गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

121. एस.पी. शिवदीप लाण्डे: “सुपर कॉप”


(31 मार्च को इसे मैंने "कभी-कभार" ब्लॉग पर लिख दिया था. अब लग रहा है, इसे "देश-दुनिया" में होना चाहिए था.)


       हो सकता है, बहुत-से लोग इस नाम से परिचित न हों। गूगल सर्च में Shivdeep Lande टाईप करके देखा जा सकता है कि वे कितने साहसी और ईमानदार पुलिस अफसर हैं। आज की भाषा में उन्हें सुपर कॉप ही कहा जा सकता है! फेसबुक पर भी उनपर दर्जनभर ‘पृष्ठ’ बने हुए हैं
       वे हमारे अररिया जिले के एस.पी. हैं। उन्हें पटना से हटाकर यहाँ भेजा गया था। पटना में 10 महीनों के अन्दर ही माफिया-राजनीति गठजोड़ की नींव हिल गयी थी। तब जल्दी से उन्हें हटाया गया। नीतिश बाबू यह तो नहीं ही कह सकते हैं कि इस तबादले में उनकी सहमति नहीं थी।
       यहाँ अररिया में उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर मैं भी उनके ऑफिस में जाकर एकबार उनसे मिला था और कहा था कि आपकी ईमानदारी और बहादूरी के किस्से सुनकर हमें बहुत खुशी होती है।
       कल के अखबार में देखा- एस.पी. लाण्डे का अररिया से तबादला! बाहर आकर देखा- इस खबर से आक्रोशित लोगों द्वारा सड़कें जाम! आज भी बाजार बन्द है।
       आप कहेंगे- तबादला तो रूटीन है। ठीक है। जैसे अररिया जिला के छोटे-बड़े सारे अपराधी गिरफ्तार हुए, ऐसा दूसरे जिलों में भी होना चाहिए। मैं सहमत हूँ। मगर जब आपको पता चले कि एस.पी. लाण्डे को किसी दूसरे जिले का एस.पी. बनाकर नहीं, बल्कि राज्यपाल का ए.डी.सी. बनाकर यहाँ से भेजा जा रहा है, तब आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? यही न, कि राजनेताओं ने अपने माफियाओं की परेशानी को समझते हुए एक ईमानदार एवं साहसी पुलिस अफसर को शण्टिंग में भेज दिया?
       जहाँ तक मैं समझता हूँ, बिहार में जितने भी जिले हैं, सबके माफिया-सरगनाओं ने समवेत स्वर में राजनेताओं (यानि आपने आकाओं) से अपील की होगी कि चाहे जहाँ भी भेजिये, मगर एस.पी. लाण्डे को हमारे जिले में मत भेजिये!
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       मैं व्यक्तिगत रुप से नीतिश कुमार के प्रति सम्मान की भावना रखता हूँ। क्योंकि लालू-राबड़ी के 15 वर्षों के शासनकाल में देशभर में बिहार (झारखण्ड भी) की जो बदनामी फैली हुई थी, उससे नीतिश बाबू ने हमें निजात दिलायी है।
मगर एक तरफ सुशासन की बात करना और दूसरी तरफ एक ईमानदार पुलिस अफसर को महत्वहीन पोस्ट पर भेजना- इस रवैये की मैं घोर निन्दा करता हूँ। चाहे सहयोगी नेताओं का कितना भी दवाब हो, नीतिश जी को ऐसा नहीं करना चाहिए!
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अन्त में, एक चायवाले की टिप्पणी, जिससे नीतिश बाबू को समझ जाना चाहिए कि आम लोग इस तबादले को किस रुप में देख रहे हैं- अररिया जिला के अपराधियों ने एक से लेकर पाँच करोड़ तक खर्चा किया होगा- लाण्डे साहब को हटाने के लिए...
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1 टिप्पणी:

  1. ईमानदार अफसरों को ज्यादा दिन एक जगह पर रहने ही तो नहीं दिया जाता है !!

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