शुक्रवार, 8 जून 2012

'आयोडीन युक्त' नमक- सच्चाई क्या है?


13 फरवरी 2012 को लिखा गया 

      जिनका बचपन कस्बों या बड़े गाँवों में बीता है, उन्हें याद होगा कि पहले किराने की दूकानों में नमक की बोरियों को दरवाजे के बाहर ही रखा जाता था- रात में जब दूकान के दरवाजे बन्द होते थे, तब ये बोरियाँ बाहर ही रखी रहती थीं। यह सबसे सस्ता भी हुआ करता था।
      बाद के दिनों में बड़े एवं मँझोले व्यवसायिक घरानों की (गिद्ध)दृष्टि इस चीज पर पड़ी होगी- अरे, इसे तो गरीब-से-गरीब परिवार भी खरीदता है, क्यों न इस व्यवसाय से कमाई की जाय। और एक षड्यंत्र के तहत "आयोडीन युक्त" नमक का हौव्वा खड़ा किया गया तथा साधारण नमक की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाते हुए इसे बाजार से हटा ही दिया गया। सरकार ने व्यवसायिक घरानों का भरपूर साथ दिया- इसका अफसोस नहीं है (सरकार का तो यह काम ही है); मगर हमारे वैज्ञानिक समुदाय ने भी इस षड्यंत्र में व्यवसायिक घरानों का साथ दिया- यह अफसोस की बात है।
      मान लिया कि "आयोडीन युक्त" नमक जरूरी है, मगर इस व्यवसाय को कुटीर एवं लघु उद्योगों की ही श्रेणी में क्यों नहीं रखा गया? क्यों "टाटा" को भी नमक बेचने की अनुमति दी गयी, जो "ट्रक" भी बेचता है? नमक में "आयोडीन" मिलाकर उसे प्लास्टिक की थैलियों में पैक करने में क्या बहुत ही हाई-फाई तकनीक की जरुरत होती है?
      रेडियो पर दिनभर सरकारी विज्ञापन (पी।एस।ए।) आता है कि खाने में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने से बच्चा शारीरिक व मानसिक रुप से तन्दुरुस्त पैदा होता है। और लोग इसे किस रुप में देखते हैं, पता नहीं; मगर मैं इसे इस रुप में देखता हूँ कि सरकार गरीब जनता को मूर्ख बना रही है- वह कहती है, बस "आयोडीन युक्त" नमक का इस्तेमाल करो, बच्चा स्वस्थ एवं मेधावी बनेगा- "पौष्टिक आहार" की कोई जरुरत ही नहीं है! इस विज्ञापन का उपयोग सरकार गरीबों पर "अफीम" के रुप में कर रही है। अब सरकार गरीब गर्भवती महिलाओं को दूध-फल तो दे नहीं सकती, सो उन्हें बहला रही है। जबकि यह तथ्य है कि गर्भावस्था में चूँकि बच्चा माँ के शरीर से ही अपना भोजन ग्रहण करता है, इसलिए माँ के लिए "पौष्टिक आहार" जरूरी है।
      विज्ञापन यह बताना भी नहीं भूलता कि "सूई की नोंक बराबर" आयोडीन की हमें आवश्यकता होती है। क्या आयोडीन की इतनी नगण्य मात्रा "साधारण नमक" में नहीं होती? फिर प्राचीनकाल से लेकर बीसवीं सदी तक इस देश में स्वस्थ एवं मेधावी लोग कैसे पैदा हो गये? कौन जानता है कि "आयोडीन युक्त" नमक की थैलियों में भरे गये नमक में "अलग से" "आयोडीन" मिलाया ही जाता है? क्या इन थैलियों में "साधारण नमक" ही नहीं होता? दिल्ली-मुम्बई में जो "मिनरल वाटर" बिकता है, क्या उनमें सादा (या फिल्टर किया हुआ) पानी नहीं होता? कौन मिलाता है उनमें "मिनरल"? 
      कोई कुछ भी कहे, मेरा दिल तो यही कहता है कि "आयोडीन युक्त" नमक की "अनिवार्यता" की बात एक "हौव्वा" है, एक षड्यंत्र है; कुछ व्यवसायिक घराने इसकी आड़ में जबर्दस्त कमाई कर रहे हैं; सरकार कुछ हिस्सा लेकर उनके लिए प्रचार कर रही है; और जाने-अनजाने में हमारा वैज्ञानिक समुदाय भी इस षड्यंत्र में शामिल है!
      (कभी-न-कभी इस षड्यंत्र का पर्दाफाश होगा- यह भी मैं जानता हूँ!)  

4 टिप्‍पणियां:

  1. 'फेसबुक' से साभार-
    स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
    आयोडीन युक्त नमक
    ग्लोबलाइजेशन ने इस देश के गरीबों से जीने का अधिकार छीन लिया है | ग्लोबलाइजेशन के नाम पर ५० पैसे किलो बिकने वाला नमक आज १८ रूपये किलो बिक रहा है | करोड़ों गरीबों को इस देश में सिवाय रोटी के साथ नमक खाने के अलावा कोई दूसरी चीज सपने में भी नहीं आती है, आप जिस वर्ग से आते हैं, आप शायद तुअर (रहर) की दाल खा सकते हैं, बासमती चावल खा सकते हैं, दो सब्जियां खा सकते हैं | हिन्दुस्तान में तो ८४ करोड़ लोग रोटी को नमक के साथ या नमक और मिर्च के साथ खाते हैं और उन ८४ करोड़ लोगों में, जिनके पास औसतन खर्च करने के लिए ५ रुपया भी नहीं है और उनको अगर १८ रूपये का नमक बेंच रहे है तो आप ये कर क्या रहे हैं ? ये ग्लोबलाइजेशन नहीं इकोनोमिक रिकोलोनाइजेशन हो रहा है | लेकिन देश में नमक पर इतना भारी टैक्स हो गया है कि ५० पैसे किलो वाला नमक आज १८ रूपये में बिक रहा है और कोई उफ़ तक नहीं कर रहा है | आपके जैसे लोगों की मजबूरी मैं समझ सकता हूँ, आपके लिए नमक १८ रूपये का बिके या ५० रूपये का, आपको कोई अंतर नहीं पड़ने वाला लेकिन तकलीफ उन ८४ करोड़ लोगों की है जिनके पास एक दिन में खर्च करने के लिए ५ रुपया नहीं है, तकलीफ उनकी है और कभी उनके जगह पर अपने को रख कर देखिये और सोचिये कि कैसे इस देश के ८४ करोड़ लोग रोटी खा रहे होंगे तब से जब से ५० पैसे किलो वाला नमक १८ रूपये किलो के भाव में बिक रहा है |

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  2. पूरी बर्बरता के साथ भारत सरकार द्वारा फरमान जारी किया गया था कि कहीं भी बिना आयोडीन वाला नमक नहीं बेचा जाए, मतलब हर जगह वो १८ रूपये वाला ही नमक बिकेगा | आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूँ कि आयोडीन हर नमक में होता है, कोई भी नमक बिना आयोडीन के नहीं होता क्योंकि नमक बनता है समुद्र के पानी से और सूरज की रौशनी से, कोई तकनीक नहीं लगती,कोई मशीन नहीं लगती और समुद्र के पानी में सबसे ज्यादा आयोडीन होता है, विज्ञान की जानकारी के अनुसार | तो समुद्र के पानी में आयोडीन है और उससे बनने वाले नमक में भी आयोडीन है और हमको साधारण स्तर पर एक दिन में १२५ माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है बस | और जो साधारण नमक हम खाते है उसके माध्यम से एक दिन में १७५ माइक्रोग्राम आयोडीन खा जाते है मतलब जितनी जरूरत है उससे भी ५० माइक्रोग्राम ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं, तो इस देश में आयोडीन की कमी कहाँ है ? ये तो सबसे बड़ा झूठ है जो इस देश में आजादी के बाद से बोला जा रहा है पिछले बीस साल से | और ये झूठ बोला गया जब ग्लोबलाइजेशन के नाम पर एक विदेशी कम्पनी को नमक बनाने और बेचने का अधिकार दिया गया और उस विदेशी कम्पनी के नमक का नाम था अन्नपुर्णा | कंपनी का असली नाम है हिन्दुस्तान यूनिलीवर | जब से हिन्दुस्तान यूनिलीवर को इस देश में नमक बेचने का लाइसेंस मिला तब से आयोडीन का चक्कर चलाया इन कंपनियों ने और मैं आरोप लगाता हूँ कि इस देश के बड़े-बड़े सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं जिन्होंने गलत रिपोर्ट पेश कर के इस देश के लोगों के मन में ये डर पैदा कर दिया कि आपको आयोडीन की कमी हो गयी है, इसलिए आपको आयोडीन वाला नमक खाना चाहिए |

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  3. और एक बार एक सांसद के माध्यम से जब ये प्रश्न संसद में पुछवाया कि "आयोडीन की कमी के कारण पुरे देश में जो बीमारियाँ हैं, जैसे घेंघा सबसे ज्यादा है तो उसके मरीज कितने हैं ? तो भारत सरकार का उत्तर था कि "जितनी कुल बिमारियों के मरीज हैं उसमे ०.३% मरीज घेन्धा के हैं और वो कहाँ हैं तो भारत के पर्वतीय इलाकों में" | और इन पर्वतीय इलाकों में भारत की कुल आबादी के ५% लोग ही रहते हैं, अगर आयोडीन की कमी को मान भी लिया जाए तो ये कमी भारत के पर्वतीय इलाकों में है, सामान्य इलाकों में कोई कमी नहीं है लेकिन पुरे भारत में ये नाटक चला और दुर्भाग्य से आज भी चल रहा है और इस नाटक के पीछे का एक ही सत्य है कि एक विदेशी कंपनी को नमक बेचना था और उसको करोड़ों रूपये का मुनाफा कमाने का मौका देना था इसलिए वो कंपनी ५० पैसे के नमक को २ रूपये से शुरू कर के आज १८ रूपये में बेच रहा है आयोडीन नाम के धोखे के साथ | और कैसे लुट रहे हैं आपको - अगर आयोडीन युक्त नमक बनाया जाए एक किलो तो उसका लागत मूल्य आता है एक रूपये और उसमे अगर आयोडीन मिलाया जाए तो लागत और ५० पैसे बढ़ जाएगा, दुकानदारों का कमीशन और ढुलाई खर्च जोड़ दिया जाए तो ३ रूपये प्रति किलो से ज्यादा इसका मूल्य नहीं होना चाहिए लेकिन इसे बेचा जा रहा है १८ रूपये प्रति किलो के हिसाब से, मतलब १५ रूपये का शुद्ध मुनाफा और भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार आज भारत में नमक बिक रहा है ५० लाख टन, और एक किलो नमक पर मुनाफा अगर १५ रूपये का है तो हमारी जेब से कितना पैसा निकल रहा है, आप जोड़ सकते हैं | और ये उस देश में हो रहा है जिस देश में महात्मा गाँधी ने नमक पर टैक्स के विरोध में नमक सत्याग्रह किया था | नाथूराम गोडसे ने तो महात्मा गाँधी के शरीर की हत्या की थी और इन लोगों ने तो गाँधी जी के विचार को मार दिया है, ये तो नाथूराम से बड़े हत्यारे हैं और यही लोग हर साल ३० जनवरी और २ अक्टूबर के अवसर पर गाँधी जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, पता नहीं किस मुंह से |

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  4. विकल्प
    हमारे यहाँ जो ब्लड प्रेसर, सुगर और थायराइड की समस्या बढ़ी है उसमे आयोडीन युक्त नमक का सबसे बड़ा हाथ है | आपको स्वस्थ्य रहना है तो सबसे पहले तो अपना नमक बदलिए | आप सेन्धा नमक का प्रयोग कीजिये और इसे ऊपर से छिड़क कर या बुरक कर मत खाइए | सब्जी या दाल बनते समय ही इसे डालिए, मतलब नमक डालने के बाद उसमे उबाल आना चाहिए, ऊपर से डाला हुआ नमक जहर के समान होता है इसलिए ऊपर से नमक मत डालिए | सलाद वगैरह में ऊपर से छिड़क कर खाना है तो काला नमक का प्रयोग कीजिये |

    जय हिंद
    राजीव दीक्षित

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